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पिछले चार माह में हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को किया गया मजबूत : सीएम त्रिवेंद्र

आर्थिक गतिविधियों ने दुबारा गति पकड़ी

देेेहरादून| मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने कहा है कि पिछले चार माह में राज्य में हेल्थ इन्फ्रास्ट्रक्चर को काफी मजबूत किया गया है। कोविड-19 के दृष्टिगत समय-समय पर परिस्थिति अनुरूप  आवश्यक निर्णय लिए गए। प्रदेश में सुनियोजित तरीके से कोविड-19 से लड़ाई लड़ी जा रही है। राज्य स्तर पर लगातार स्थिति की समीक्षा की जाती है और जरूरी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाती हैं। आज राज्य में कोविड-19 नियंत्रित अवस्था में है। पाॅजिटिव केस आ रहे हैं परंतु हमारी रिकवरी रेट भी बेहतर है। अब सर्विलांस, टेस्टिंग, कान्टेक्ट ट्रेसिंग, क्लिनिकल मैनेजमेंट और जन जागरूकता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कोविड-19 से लडाई लम्बी, अनुशासन से जीत सम्भव

मुख्यमंत्री ने कहा कि कोविड-19 से लड़ाई बहुत लम्बी है। हम अपने दैनिक व्यवहार में बदलाव लाकर ही इस लड़ाई को जीत सकते हैं। मास्क का प्रयोग, दो गज की दूरी और हाथों को बार-बार धोना इन छोटी-छोटी परंतु सबसे महत्वपूर्ण बातों को अपनी आदत में लाना होगा। इसमें सबको जागरूक बनना होगा।

बढी स्वास्थ्यगत सुविधाएं, जरूरी उपकरण पर्याप्त संख्या में उपलब्ध

मुख्यमंत्री ने कहा कि 5 सरकारी और 2 प्राईवेट लेब में कोविड-19 के संक्रमण के सेम्पल की जांच की जा रही है। इसके अतिरिक्त एनसीडी दिल्ली और पीजीआई चंडीगढ़ में भी सेम्पल टेस्टिंग के लिए भेजे जा रहे हैं। कुछ अन्य प्राईवेट लेब को भी मंजूरी दी गई है। मार्च में हमारे यहां कोरोना संक्रमण की टेस्टिंग सुविधा नहीं थी। सेम्पल टेस्टिंग की सुविधा जिला स्तर पर कराने के लिए जिलों को 16 ट्रूनेट मशीनें उपलब्ध करा दी गई हैं। प्रदेश के चिकित्सालयों में फ्लू क्लिनिक के माध्यम से आ रहे समस्त श्वास व इंफ्लूएंजा जैसे लक्षणों वाले मरीजों का कोविड-19 संक्रमण जांच के लिए सेम्पल लिए जा रहे हैं। प्रदेश में 5 डेडिकेटेड कोविड अस्पताल (डीसीएच), 12 डेडिकेटेड कोविड-19 हेल्थ सेंटर (डीसीएचसी), 331 डेडिकेटेड कोविड केयर सेंटर्स हैं जिनमें 24327 आइसोलेशन बेड, 273 आईसीयू बेड तथा 161 वेंटिलेटर उपलब्ध हैं। राज्य के कोविड चिकित्सालयों में 95550 एन 95 मास्क एवं 144911 पीपीई किट उपलब्ध हैं। राज्य में कोविड फेसिलिटी में आक्सीजन सपोर्ट बेड संख्या बढ़कर 1126, आईसीयू बेड की संख्या 279 और वेंटीलेटर की संख्या 179 हो गई।

सभी जनपदों में आईसीयू स्थापित

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में कान्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए तीन राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम कार्यरत हैं। सभी जिलों में बीआरटी व सीआरटी सक्रिय हैं। वर्ष 2017 में राज्य में जहां केवल 3 मेडिकल कालेजों में 62 आई०सी0यू0, 37 वेण्टीलेटर तथा 04 बाईपैप मशीनें ही थीं। जबकि वर्तमान में कुल 251 आई0सी0यू0, 113 वेण्टीलेटर तथा 33 बाईपैप मशीनें स्थापित की जा चुकी हैं। वर्ष 2017 में जहां प्रदेश में मात्र 3 जनपदों में आई0सी0यू0 स्थापित थे वहीं अब राज्य के सभी  जनपदों में आई0सी0यू0 की स्थापना पूर्ण हो चुकी है।

कोरोना की सेम्पलिंग व टेस्टिंग बढ़ाने पर जोर

कोविड की टेस्टिंग बढ़ाने के लिए दून, हल्द्वानी व श्रीनगर मेडिकल कालेज के लिए 3 हाईटेक टेस्टिंग मशीनें क्रय करने के लिए 11.25 करोड़  रूपए की धनराशि स्वीकृत की गई है। कोविड-19 की सैम्पलिंग बढ़ाने के लिए प्राईवेट संस्थानों का सहयोग भी लिया जाएगा। प्राईवेट संस्थानों से राज्य सरकार जो भी सेम्पलिंग करवाएगी , उसका व्यय राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा। 13 जिला चिकित्सालयों/ उपजिला चिकित्सालयों में आक्सीजन सप्लाई पाईप लाईन के निर्माण कार्य के लिए कुल 578 लाख 34 हजार रूपए की राशि अनुमन्य की गई है। कोविड-19 संक्रमण से बचाव के लिये उत्तराखण्ड में चार चिकित्सालयों में आईसीयू की स्थापना के लिए 1267.40 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है। इसमें उप जिला चिकित्सालय कोटद्वार के लिए 356.70 लाख रूपये , उप जिला चिकित्सालय रानीखेत के लिए 343.19 लाख रूपये, जिला चिकित्सालय टिहरी के लिए 274.51 लाख रूपये और सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र मसूरी के लिए 293 लाख रूपये की स्वीकृति दी गई है।

कोरोना वारियर्स को प्रोत्साहन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में ई-संजीवनी टेलीमेडिसीन सेवा प्रारंभ की गई है। 400 से अधिक चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है। आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्रियां, कोरोना वारियर्स के रूप में फ्रंटलाईन में बहुत ही बेहतर काम कर रही हैं। प्रत्येक आंगनबाड़ी और आशा कार्यकत्रि के खाते में एक-एक हजार रूपए की सम्मान राशि हस्तांतरित की जा रही है। प्रदेश में इनकी संख्या 50 हजार से अधिक है। केंद्र पोषित योजना के अंतर्गत राजकीय दून मेडिकल काॅलेज में यू स्किल सेंटर की स्थापना के लिए 140 लाख रूपए की वित्तीय स्वीकृति दी गई। कोविड-19 से बचाव और रोकथाम के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष से कुल 124 करोड़ रूपए की राशि अवमुक्त की गई है। जिला योजना में 260 करोड़ रूपए अवमुक्त किए गए हैं।

3 लाख 27 हजार से अधिक प्रवासियों को लाने की व्यवस्था की गई

मुख्यमंत्री ने कहा कि अन्य राज्यों से लगभग 3.27 लाख प्रवासियों को विभिन्न माध्यमों से वापस लाया गया है। उत्तराखण्ड से दूसरे राज्यों के लगभग 1 लाख लोगों को भेजा गया है। ट्रेनों से भी प्रवासियों को लाया गया है। अहमदाबाद, मुम्बई, सूरत, पुणे, दिल्ली, चेन्नई, बंगलौर आदि स्थानों से प्रवासियों को लाया गया है या लाने की प्रक्रिया गतिमान है। व्यय भार उत्तराखण्ड सरकार द्वारा वहन किया गया। राज्य सरकार ने रेल मंत्रालय को एडवांस भी जमा कराया। पूरी सतर्कता और सावधानी के साथ बाहर से प्रवासियों को लाने की व्यवस्था की गई। भारत सरकार के सारे प्रोटोकाल का सख्ती से पालन किया गया। बाहर से आने वाले लोग होम क्वारेंटीन का पूरा पालन करें, इसके लिए ग्राम प्रधानों को डिजास्टर मेनेजमेंट एक्ट में कुछ अधिकार दिए गए हैं। क्वारेंटाईन सेंटरों में सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं।

अपना काम शुरू करने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना

मुख्यमंत्री ने कहा कि जो प्रवासी उत्तराखण्ड लौट कर आए हैं, राज्य सरकार को उनके रोजगार की भी चिंता है। राज्य में लौटे प्रवासियों को स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को कुल 110 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई है। प्रधानमंत्री स्वरोजगार योजना की तर्ज पर मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना को मंजूरी दी गई है। इसमें निर्माण और सेवा क्षेत्र में अपना काम करने के लिए ऋण व अनुदान की व्यवस्था की गई है। इसी प्रकार और भी अनेक योजनाओं पर विचार किया जा रहा है। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना, युवाओं और प्रदेश में लौटे प्रवासियों के लिए एमएसएमई के तहत बनाई गई है। योजना में विनिर्माण में 25 लाख और सेवा क्षेत्र में 10 लाख तक की लागत की परियोजना पर स्वरोजगार के लिए ऋण ले सकेंगे। इसमें 25 प्रतिशत तक अनुदान की व्यवस्था है। मार्जिन मनी अनुदान के रूप में समायोजित की जाएगी। अन्य विभागों में संचालित स्वरोजगार योजनाओं को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के अंतर्गत लाते हुए युवाओं को लाभ दिलाने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि डेरी विकास में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना प्रारम्भ की गई है। डेरी विकास विभाग में राष्ट्रीय सहकारी विकास परियोजना के अंतर्गत डेरी क्षेत्र के लिए कुल 444.62 करोड़ रूपए स्वीकृत हैं। इसके तहत लगभग 5400 लाभार्थियों को 20 हजार दुधारू पशु क्रय कराए जाएंगे।

गरीबों को राशन के वितरण की व्यवस्था

उत्तराखण्ड लौटे प्रवासियों के लिए राशन की व्यवस्था की गई है। ऐसे लोग जिनके पास किसी भी राज्य का राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना का कार्ड है, उनको वन नेशन वन कार्ड योजना के अंतर्गत सफेद व गुलाबी कार्ड की भांति लाभ दिया गया ऐसे लोग जिनके पास कोई कार्ड नहीं है, उन्हें भी ‘आत्मनिर्भर भारत योजना’ के अंतर्गत प्रति यूनिट 5 किग्रा चावल और 1 किग्रा दाल का निशुल्क लाभ दिया गया। प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के अंतर्गत उत्तराखण्ड राज्य के 61.94 लाख व्यक्तियों को अप्रैल, मई व जून माह का खाद्यान्न दिया गया है। इसमें प्रति माह प्रति व्यक्ति 5 किलो चावल और प्रति परिवार 1 किलो दाल निशुल्क वितरित की गई है। योजना का विस्तार नवम्बर 2020 तक होने से आगे 5 माह और भी इसका लाभ पात्र व्यक्तियों को मिलता रहेगा।
राज्य खाद्य योजना के अंतर्गत 10.28 लाख परिवारों के लिए राज्य सरकार द्वारा तीन माह( अप्रैल-मई जून 2020) हेतु प्रति कार्ड वितरण स्केल को बढ़ाते हुए 20 किलोग्राम खाद्यान्न (10 किलोग्राम गेहूं वह 10 किलोग्राम चावल) प्रति कार्ड किया गया।

औद्योगिक गतिविधियां दुबारा शुरू, सरकार ने की मदद

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की आर्थिकी में सुधार लाने के लिए राज्य सरकार पूरे प्रयास कर रही है। श्री इंदुकुमार पाण्डेय की अध्यक्षता में गठित समिति ने अपनी अंतरिम रिपोर्ट दे दी है।
राज्य में उद्यमियों की सुविधा के लिए उद्योग के संचालन की अनुमति हेतु एकल खिड़की की व्यवस्था की गई है। इस व्यवस्था के माध्यम से उद्योगों को संचालन की अनुमति दी गई है। लॉक डाउन की अवधि में भी कोविड-19 से सुरक्षा हेतु आवश्यक उपायों के दृष्टिगत आवश्यक वस्तुओं का उत्पादन करने वाली ईकाइयों को बंदी से मुक्त रखा गया था। राज्य में केंद्र सरकार की गाईडलाईन के अंतर्गत औद्योगिक गतिविधियां शुरू की गई हैं। हजारों उद्योगों को संचालन के लिए अनुमति दी गई है। इनमें से बहुत सी इकाइयों ने काम शुरू कर दिया है। उद्योगों को तमाम तरह की सहूलियतें दी गईं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सहमति की अवधि को एक वर्ष का विस्तार दिया गया जिस पर कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा। औद्योगिक और वाणिज्यिक श्रेणी के उपभोक्ताओं से मार्च 2020 से मई 2020 तक, की गई बिजली खपत के सापेक्ष फिक्सड /डिमान्ड चार्ज की वसूली स्थगित की गई। विलम्ब भुगतान अधिभार से छूट दी गई। रोड टैक्स में 03 माह की छूट दी गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन व्यवसाय में पंजीकृत 2.25 लाख गाईड, राफ्टर, पोर्टर और परिवहन विभाग में पंजीकृत 25 हजार आॅटो, ई-रिक्शा संचालकों को एकमुश्त एक-एक हजार रूपए दिए जाने का निर्णय लिया गया। इससे सरकार पर 25 करोड़ का भार पड़ेगा। वीर चंद्र सिंह गढ़वाली स्वरोजगार योजना और पं.दीनदयाल उपाध्याय  होम-स्टे योजना में ऋण लेने वालों को अप्रेल से जून माह तक ब्याज पर छूट दी गई है।

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