चारधाम : गंगोत्री धाम 10 नवंबर और यमुनोत्री धाम 11 नवंबर को होंगे बंद
देहरादून। चारधाम में गंगोत्री धाम के कपाट अन्नकूट पर्व पर 10 नवंबर को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। वहीं, यमुनोत्री व केदारनाथ धाम के कपाट परंपरा के अनुसार भैयादूज पर्व पर 11 नवंबर को बंद किए जाएंगे।
प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट 11 नवंबर को भैया दूज के पावन पर्व पर शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त सुबह 10 बजकर 28 मिनट तय किया गया है। अनुराधा नक्षत्र और सौम्य धनु लग्न में विधि-विधान के साथ कपाट बंद किए जाएंगे।
विजयदशमी के पर्व पर यमुनोत्री धाम में मंदिर समिति और पुरोहित समाज की मौजूदगी में बैठक हुई। बैठक में पंचांग और धार्मिक परंपराओं के अनुसार कपाट बंद करने का शुभ मुहूर्त निकाला गया। इसके साथ ही यमुनोत्री धाम के शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि भी निर्धारित हो गई है।यमुनोत्री धाम चारधाम यात्रा के प्रमुख पड़ावों में शामिल है। हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु मां यमुना के दर्शन के लिए यहां पहुंचते हैं। शीतकाल शुरू होने के साथ ही धाम के कपाट परंपरागत रूप से बंद कर दिए जाते हैं। इसके बाद मां यमुना की पूजा-अर्चना शीतकालीन प्रवास स्थल पर की जाती है।
रुद्रनाथ की उत्सव डोली पहुंची गोपीनाथ मंदिर
चमोली। चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली के गोपेश्वर स्थित गोपीनाथ मंदिर पहुंचते ही पूरा परिसर भोलेनाथ के जयकारों से गूंज उठा। वहीं डोली के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। हजारों की संख्या में पहुंचे भक्तों ने भगवान रुद्रनाथ के दर्शन कर पूजा-अर्चना की और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। श्रद्धालुओं की भीड़ और जयकारों के बीच गोपीनाथ मंदिर में भक्ति का अद्भुत माहौल देखने को मिला। उत्सव डोली के दीदार और आशीर्वाद के लिए श्रद्धालुओं का रेला उमड़ पड़ा।
गौर हो कि भगवान रुद्रनाथ की पावन उत्सव डोली के गोपेश्वर आगमन के साथ ही गोपीनाथ मंदिर परिसर पूरी तरह शिवमय हो गया। बाबा भोलेनाथ के गगनभेदी जयकारों और शंखध्वनि के बीच जैसे ही डोली ने मंदिर में प्रवेश किया, वहीं उत्सव डोली को देख हजारों श्रद्धालुओं की आंखें श्रद्धा से छलक उठी। मंदिर में उत्सव डोली पहुंचते ही पूरा परिसर भक्ति के अलौकिक रंग में डूब गया। उच्च हिमालयी क्षेत्र में स्थित चतुर्थ केदार भगवान रुद्रनाथ मंदिर के कपाट 17 अक्टूबर की देर रात 11 बजे विधि-विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए थे। कपाट बंद होने के बाद भगवान रुद्रनाथ की उत्सव डोली पारंपरिक रीति-रिवाजों और जयकारों के बीच शीतकालीन गद्दीस्थल गोपेश्वर के गोपीनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई। डोली के गोपीनाथ मंदिर पहुंचने के साथ ही शीतकालीन पूजा की पर





















