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गरीबी, अकेलेपन और संघर्षों से रेसलर तक का सफर, जानिए खबर

हरियाणा | हरियाणा के पानीपत के ललित शहरावत ने जिंदगी में कितनी भी मुश्किलें आईं हो लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। बचपन में मां का साया उठ गया तो पिता का भी सहारा भी नसीब नहीं हुआ। लेकिन पानीपत के इस खिलाडी ने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके और चुनौतियों का डटकर सामना किया। गरीबी, अकेलेपन और संघर्षों से भरे रास्ते पर चलते हुए ललित ने न सिर्फ खुद को संभाला, बल्कि वह एशियन कुश्ती चैंपियनशिप के फाइनल में पहुंचकर इतिहास रचने से महज एक कदम दूर हैं। ललित ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप के सेमीफाइनल में उलटफेर किया और चीन के नंबर-1 पहलवान को हराया। ललित की कहानी सिर्फ एक जीत नहीं बल्कि जिद, जुनून और जज्बे की मिसाल है। जिसने हर मुश्किल को पटखनी देकर देश का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। ललित का अब फाइनल में उज्बेकिस्तान के तीसरे वरीयता प्राप्त इख्तियार बोतिरोव से मुकाबला होगा। ललित के पास एशियाई खिताब जीतने वाले चौथे भारतीय ग्रीको-रोमन पहलवान बनने का सुनहरा मौका है। मैट पर उनके शानदार टेकडाउन के बिल्कुल उलट पानीपत की गलियों से लेकर एशियन पोडियम तक का सफर जरा भी आसान नहीं रहा है।

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