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जयपुर में 40 दिवसीय ‘महिला एवं बाल संस्कार शिविर’ हुआ आयोजन

सम्पूर्णा संस्था द्वारा आयोजित कार्यक्रम

नई दिल्ली / जयपुर | 1993 में स्थापित, सम्पूर्णा दिल्ली में स्थित एक ऐसा गैर-सरकारी संगठन है जो महिलाओं और बच्चों को सशक्त बनाने के मिशन के साथ काम कर रहा है। इसकी संस्थापिका डॉ. शोभा विजेन्द्र तीन दशकों से भी अधिक समय से महिलाओं के अधिकारों के लिए लड़ रही सामाजिक कार्यकर्ता हैं। गर्मियों की छुट्टियों में आयोजित 40 दिवसीय ‘महिला एवं बाल संस्कार शिविर’ उनके द्वारा चलाए जा रहे कार्यक्रमों का ही एक हिस्सा है। इस शिविर में प्रतिभागियों को प्रार्थना, मंत्रोच्चारण, वैदिक श्लोक, शिष्टाचार तथा सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से नैतिक एवं आध्यात्मिक विकास की दिशा में मार्गदर्शन दिया जाता है। सेल्फ डिफेंस सिखाया जाता है और विभिन्न सृजनात्मक गतिविधियों द्वारा उन्हें रचनात्मक रूप से सक्षम बनाया जाता है। 40 दिन के शिविर का सोलहवां व सत्रहवां दिन जयपुर में स्थित सोहम फार्म में संपन्न हुआ। पहले सत्र का विषय था-‘मां और प्रकृति के सान्निध्य में संस्कारों की यात्रा।’ कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन से हुआ, जिसमें राष्ट्रीय प्रभारी, हरियाणा, सतीश पूनिया, विधायक एवं आध्यात्मिक संत स्वामी बालमुकुंदाचार्य, राष्ट्रीय महिला मोर्चा उपाध्यक्ष पूजा कपिल मिश्रा तथा संस्थापिका डॉ. शोभा विजेन्द्र की गरिमामयी उपस्थिति रही। डॉ. शोभा विजेन्द्र, संस्थापिका सम्पूर्णा ने अपने विचार रखते हुए सनातन और पाश्चात्य संस्कृतियों के मूलभूत अंतर को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि पाश्चात्य संस्कृति व्यक्ति को केंद्र में रखती है, जबकि सनातन संस्कृति परिवार, समाज और प्रकृति के सामूहिक उत्थान की बात करती है। उन्होंने कहा कि पहले हमारी मुख्य केंद्रबिंदु महिला थी, फिर समझ आया कि हम उसकी स्थिति में चाहे कितना ही सुधार क्यों न कर लें, जब तक कि उसका परिवार उसके साथ नहीं होगा, उसके विकसित होने से कोई सुधार न होगा। तब हमने महिला को केंद्र में रखकर परिवार को बेहतर बनाने की दिशा में काम करना शुरू किया।’ स्वामी श्री बालमुकुंदाचार्य जी ने कहा कि “गृहिणी के बिना कोई भी घर पूर्ण नहीं होता।” उन्होंने महिलाओं को समाज और राष्ट्र निर्माण की आधारशिला बताया और वर्तमान समय में सोशल मीडिया के दुष्प्रभावों से सचेत रहने की सलाह दी। सतीश पूनिया जी ने केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही महिला सशक्तिकरण योजनाओं की जानकारी दी और कहा कि पहले जहां बेटियों को जन्म से पहले ही रोक दिया जाता था, आज वही बेटियां राष्ट्र की शक्ति और सम्मान बन रही हैं। राष्ट्रीय महिला मोर्चा उपाध्यक्ष पूजा कपिल मिश्रा ने कहा कि मां ही सम्पूर्ण सृष्टि का मूल है। 9 जून को 17वें सत्र में ‘जल संरक्षण और प्रकृति’ पर विशेष परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें पर्यावरण से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया। डॉ. शोभा विजेन्द्र ने अपने वक्तव्य में संस्था द्वारा जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण हेतु किए जा रहे प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा, “प्रकृति के संरक्षण में हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है। जल संकट से बचने के लिए हमें अपने स्तर पर छोटे-छोटे कदम उठाने होंगे।”
प्रख्यात लेखिका डॉ. शिप्रा माथुर ने कहा कि “देश के 70 प्रतिशत जल स्रोत वनों से जुड़े हैं, अतः वन क्षेत्रों और वनवासियों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना चाहिए।” उन्होंने जल संरक्षण के लिए चिंतन, मनन और निदिध्यासन (गहन अनुशीलन) की आवश्यकता पर बल दिया।
दीपक पर्वतीयार, संरक्षक ग्लोबल बिहारी ने विचार व्यक्त करते हुए कहा, “सूर्य, जल और वायु ईश्वर की अमूल्य देन हैं। इन पर किसी प्रकार का कर लगाना अन्यायपूर्ण है, क्योंकि ये संसाधन सबके लिए समान रूप से उपलब्ध हैं।” डॉ. अपूर्वा पाठक, राज्य प्रवक्ता, भाजपा ने सम्पूर्णा के प्रयासों की सराहना करते हुए विशेष रूप से दिल्ली जैसे शहरी क्षेत्रों में जल संग्रहण के प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया। तरुण भारत संघ के कार्यकारी निदेशक मौलिक जी ने मेवात क्षेत्र में उनके द्वारा संचालित वाटर हार्वेस्टिंग प्रोजेक्ट्स की जानकारी साझा की और स्थानीय सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला। यह आयोजन जल संरक्षण और पर्यावरण के प्रति जागरूकता लाने में संपूर्णा का एक और सफल प्रयास सिद्ध हुआ। संस्था आगे भी इस दिशा में सतत कार्य करती रहेगी। इस आयोजन में निगम पार्षद स्मिता कौशिक, संपादक व पत्रकार सुमन बाजपेयी तथा पूर्व निगम पार्षद चित्रा अग्रवाल, निर्मला चहल सहित दिल्ली व जयपुर के अनेक गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

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