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साईं सृजन पटल के प्रथम स्थापना दिवस पर आयोजित हुआ कार्यक्रम

स्थापना दिवस पर 12 प्रतिभाशाली बेटियों को किया गया सम्मानित

डोईवाला | साईं सृजन पटल का प्रथम स्थापना दिवस जोगीवाला में धूमधाम से मनाया गया, जहां इस विशेष अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 12 होनहार बेटियों को सम्मानित किया गया। यह कार्यक्रम साईं सृजन पटल के समाज में लेखन, सृजन और सकारात्मक बदलाव के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।समारोह में साईं सृजन पटल के संयोजक और सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. के.एल. तलवाड़ ने पटल के उद्देश्यों को स्पष्ट करते हुए कहा, “साईं सृजन पटल का उद्देश्य समाज में लेखन और सृजन के कार्यों को पहचान दिलाना नहीं, बल्कि उन प्रतिभाओं को सम्मानित करना है जो समाज में सकारात्मक बदलाव और प्रगति की दिशा में कार्य कर रही हैं।” उन्होंने पटल के निरंतर प्रयासों की सराहना की और उत्तराखंड की समृद्ध विरासत और संस्कृति को बढ़ावा देने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।इस अवसर पर पटल के मासिक पत्रिका के उप संपादक अंकित तिवारी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा, “हमारा उद्देश्य उत्तराखंड में लेखन और सृजन के लिए सदैव प्रतिबद्ध रहना है। इस पत्रिका के निरंतर प्रकाशन को एक वर्ष पूरा हुआ है, और हम इसे उत्तराखंड की समृद्ध विरासत और संस्कृति के दस्तावेज के रूप में प्रस्तुत कर रहे हैं।” समारोह में सम्मान प्राप्त करने वाली बेटियों में मिस उत्तराखंड-2025 की फर्स्ट रनरअप वैष्णवी लोहनी, अभिनेत्री अंशिका, अवनी पोखरियाल, छवि जोशी, स्तुति पाण्डे, संयुक्ता मेंगवाल, सृष्टि सिंह, साम्भवी लोहनी, नव्या कोहली, सौम्या चौहान, रिदिमा हुरला और अदित्री शामिल थीं। इन सभी को विशेष उपहारों से सम्मानित किया गया, जो उनके असाधारण योगदान की सराहना का प्रतीक थे। कार्यक्रम में उत्तराखंड की साहित्यिक और सांस्कृतिक धरोहर को संजोने और उसे आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की गई। इस सम्मान समारोह ने यह साबित कर दिया कि साईं सृजन पटल न केवल लेखन के क्षेत्र में, बल्कि समाज की समृद्धि और विकास के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन चुका है। समारोह में साईं सृजन पटल की सक्रिय सदस्य नीलम तलवाड़, स्वाति भंडारी, नीरज कोहली, आस्था अरोड़ा और इंसाइडी मीडिया के सीईओ अक्षत भी उपस्थित थे। यह कार्यक्रम पटल के निरंतर प्रयासों का प्रतीक है और हमें यह विश्वास दिलाता है कि साईं सृजन पटल के माध्यम से उत्तराखंड की साहित्यिक धरोहर को हमेशा जीवित रखा जाएगा।

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