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आओ मिलकर बनाये सपनों का उत्तराखण्ड : त्रिवेंद्र सिंह रावत

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देहरादून | उत्तराखण्ड राज्य स्थापना दिवस पर समस्त प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाईयां देते हुए सूबे के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा की अथक संघर्ष और अनेक बलिदानों से हमें 9 नवंबर, 2000 को उत्तराखण्ड के रूप में नया राज्य मिला। मैं, उन तमाम ज्ञात, अज्ञात आंदोलनकारियों को शत्-शत् नमन करता हूं, जिनके संघर्षों की बदौलत हमें उत्तराखण्ड राज्य मिला। उन्होंने कहा मुझे ऐसे समय में उत्तराखण्ड राज्य की सेवा का मौका मिला है, जब हमारा उत्तराखण्ड 18वें साल में प्रवेश कर रहा है। यह वह उम्र होती है जब कोई व्यक्ति किशोर अवस्था से युवा अवस्था में प्रवेश करता है। युवा मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा होता है। अपनी विफलताओं से सफलता की नई इबारत लिखने का हौसला होता है। इस दौर में चुनौतियां भी बहुत होती हैं, लेकिन उन्हीं चुनौतियों को अवसर में बदलने का भरोसा भी युवाओं में होता है। ठीक यही बात उत्तराखण्ड राज्य पर लागू होती है। पिछले 17 साल में हमने बहुत कुछ हासिल किया लेकिन अभी भी सपनों का उत्तराखण्ड बनाने के लिए बहुत कुछ किया जाना बाकी है। तमाम भौगोलिक विषमताओं, चुनौतियों और प्रकृति द्वारा कठिन परीक्षाओं के बाद भी हमारा राज्य अवसरों से भरा राज्य है। यहां मौजूद पर्यटन का अकूत खजाना, वन व जल संपदा का भंडार हमारे लिए वरदान है। इसलिए हमने नया उत्तराखण्ड बनाने का संकल्प लिया है। उत्तराखण्ड में प्रतिभाओं की कमी नहीं है। आज देश में महत्वपूर्ण पदों पर उत्तराखण्ड के लोग विराजमान हैं। उन सभी महानुभावों का नये उत्तराखंड के निर्माण में क्या योगदान हो सकता है, इस पर हमने मंथन किया है। 05 नवंबर को उत्तराखंड की इन तमाम विभूतियों को एक मंच पर लाकर हमने ‘रैबार’ कार्यक्रम आयोजित किया, जिसमें हमें कई महत्वपूर्ण सुझाव मिले। मगर आपकी सहभागिता और सुझावों के बिना यह मंथन अधूरा है। इसलिए ‘रैबार’ कार्यक्रम में मिले तमाम विशिष्ट जनों के सुझावों को मैं आपसे विषयवार साझा कर रहा हूं। इन सुझावों पर हम गंभीरता से विचार कर रहे हैं और अधिकतर सुझावों पर हमने काम शुरू भी कर दिया है। और मैं आशा करता हूं कि नया उत्तराखंड बनाने के लिए आपके अमूल्य विचार और सुझावों को भी एक जगह समाहित कर हम सब मिलकर प्रदेश के विकास में मनसा वाचा कर्मणा से जुटेंगे। राज्य के तीव्र विकास के लिए कौशल विकास पर विशेष बल देना होगा। क्षेत्रीय आवश्यकताओं की जिला स्तर पर मैपिंग कर उसके अनुरूप योजना बनानी होगी। राज्य में हॉस्पिटैलिटी सेवाओं का विकास हो। सस्टेनेबल टूरिज्म, बैलेंस टूरिज्म पर ध्यान देना होगा। उत्तराखंड को एजुकेशन हब के तौर पर विकसित किया जाए। पहाड़ों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए, कॉलेज खोले जाए। पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखण्ड के विकास के लिए पर्यटन को बढ़ावा देना होगा। हिल स्टेशनों को मास्टरप्लान के हिसाब से डेवलेप करना होगा वहां कनेक्टिविटी बढ़ानी होगी। होम स्टे योजना को बढ़ावा मिले, लेकिन संस्कृति और संस्कारों को साथ जोड़कर टूरिज्म का बैलेंस बनाए रखें। सस्टेनेबल टूरिज्म, बैलेंस टूरिज्म पर ध्यान देना होगा। एडवेंचर टूरिज्म को बढ़ाने के लिए माउटेंन बाइकिंग को प्रमोट किया जाए। वही स्वच्छता पर राजधानी की सूरत संवारी जाए, बैनर पोस्टरों की सफाई की जाए, राजधानी को वल्र्ड क्लास बनाया जाए। पलायन को लेकर सरकार अधिकाधिक गंभीर है पर्वतीय क्षेत्रों में रोजगार हो, मानव संसाधनों एवं मूलभूत आवश्यकताओं का विकास हो। पलायन के मुख्य कारण शिक्षा और स्वास्थ्य पर प्रमुखता से विचार हो। पलायन रोकने के लिए पर्यावरण संरक्षण के साथ साथ सस्टेनेबल डेवलेपमेंट अपनाना चाहिए। सीमान्त गांवों के विकास व वहां पर जनसंख्या बनाये रखने पर विशेष ध्यान देना होगा। किसानों की उत्पादन की लागत कम हो बीज, बिजली, पानी, खाद सस्ती दरों पर उपलब्ध हो जैविक उत्पादों को बढ़ावा दिया जाए किसानों के उत्पादों की ब्रांडिंग पर ध्यान देना होगा |

 

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