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इस साल दो पीढ़ियों ने एक साथ बनाया गणेशोत्सव और मुहर्रम

pahal

पुणे | इस साल गणेशोत्सव और मुहर्रम के एक साथ आने से भले की प्रशासन को सुरक्षा की चिंता सताती हो, लेकिन महाराष्ट्र के पुणे में धनोरी के रेड्डी परिवार जैसे लोग जब तक मौजूद हैं धार्मिक सौहार्द की मिसालें दिखती रहेंगी।इस साल गणेशोत्सव और मुहर्रम एक साथ मनाए गए। मुस्लिम और हिंदू दोनों समुदायों से लोग उनके घर पहुंचे। भजन मंडल के साथ कव्वाल भी बुलाए गए। हालांकि, ये सब आसान नहीं रहा। सोनू के बड़े बेटे राजू ने बताया कि कई बार कुछ मुस्लिम समुदाय ने उनके मुहर्रम के तरीके को गलत बताया और उनकी बेइज्जती का आरोप लगाया। इस पर उन्होंने अजमेर शरीफ जाकर इसे सीखा और आज वे इस परिवार की तारीफ करते हैं। इसी तरह उन्हें हिंदू समाज की ओर से भी उन्हें धमकाया गया। उनके समझाने पर उनका धर्म परिवर्तन नहीं किया गया, लोगों को समझ में आया। रिटायर्ड डिफेंस कर्मी का निधन हो चुका है लेकिन उनके घर में आज भी एक ओर गणपति बप्पा विराजे थे और दूसरी ओर मुहर्रम का ताबूत रखा जाता है। दरअसल, दो पीढ़ियों 25 साल पहले और नारायणस्वामी और लक्ष्मी रेड्डी पुणे बड़ा इमाम दरगाह में नियम से जाते थे। उनकी निष्ठा देखकर निशान और पंजा उनके घर ले जाया गया। हालांकि, 18 साल पहले उनके निधन के बाद मुहर्रम ताबूत रखना बंद हो गया। उनका बड़ा बेटा तुलसीराम अपने परिवार के साथ धनोरी में रहने लगा। करीब 6 साल पहले तुलसीराम के बेटे वेंकटेश और सोनू को सपने में ख्वाजा गरीब नवाज दिखे। परिवार ने इसे भगवान का आदेश मानते हुए मुहर्रम का ताबूत रखना शुरू कर दिया। उन्होंने रेड्डी परिवार को अल्लाह के सच्चे भक्त का वंशज बताते हुए मुहर्रम जारी रखने के लिए कहा। सोनू ने बताया कि ख्वाजा में उनका गहरा विश्वास है लेकिन साथ ही वह भगवान बालाजी को भी नहीं भूलते।

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