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‘‘जीपीएस’’ की सोच के साथ आगे बढना होगा : डा॰ कमल टावरी

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देहरादून | योजना आयोग के पूर्व सलाहकार और सेवानिवृत आईएएस डा॰ कमल टावरी ने एक प्रेसवार्ता करके बताया कि इस सदी में एक नये भारत का उदय हो चुका है। अब हम लोगो को विकास के कामों में अतिरिक्त सोच के साथ कार्य का नियोजन व आयोजन करना होगा। जिसके लिए पिछली गलतियों को न दोहराते हुए ‘‘जीपीएस’’ की सोच के साथ आगे बढना होगा। अर्थात करने वालो से सीखो, समग्रवादी सोच के साथ आगे बढो और गलतियों को दोहराने का तो वक्त ही नहीं है। उन्होने प्रेस वार्ता के दौरान कहा कि ‘‘जी’’ का मतलब हम गांव, गाय, ग्रामोद्योग, गरीब, गंगा और गणतन्त्र से मानते है। इसी तरह ‘‘पी’’ का तात्पर्य पब्लिक, प्राईवेट, पंचायत, परोपकारी, प्रगतिशील, प्राॅफीटेबल, पेड़ पेट, पर्यावरण और पूरक से है एवं ‘‘एस’’ को हम स्वाभीमानी, स्वावलम्बी, स्वरोजगारी, स्वतन्त्र, सहयोगी, संपूर्ण सम्पन्नता समृद्धशाली के साथ-साथ करूणापूरक की संम्भावनाओ को समेटते हुए उतरोत्तर विकास की ओर आगे बढने को कहेंगे। कहा कि इन कार्यो को विकसित करने के लिए सरकार के पास डीजीटल व्यवस्था है, उसका हमें उपयोग करना होगा। आज की सरकार ने ऐसी कोई भी विकास की योजना नहीं बनाई जो लोगो के काम ना आये। मगर लोगो को अरिक्त सोच के साथ अपने कार्यो को संपादित करने के लिए आगे आना होगा। जो कार्य हम लोग व्यक्तिगत या संस्थागत करना चाहते हैं तो उसके लिए ऊपर से कोई थोपी गयी योजना अब नही आने वाली। अब तो खुद की समझानुसार योजनाऐं बनाईये और सरकारी मदद से क्रियान्वित कर दिजिए। यही स्टाटप और स्टण्डप योजना है। कहा कि आप कुछ करेंगे तो सरकार आपके द्वार आ जायेगी। इस अवसर पर योजना आयोग के पूर्व सलाहकार और सेवानिवृत आएएस डा॰ कमल टावरी ने पंचायत स्तर पर उल्लेखनीय कार्य करने पर र्कीतिनगर टिहरी गढवाल की जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी जोशी व श्रीनगर चैरास के ग्राम प्रधान जयकृष्ण भट्ट को प्रतीक चिन्ह और शॅाल ओडाकर उनको सम्मानित किया है। उन्होने कहा कि आज अपना देश दुनियां के विकसित देशो के साथ इसलिए प्रतिस्पर्धा में शामील हो पा रहा है कि हमारे देश के लोगो ने स्वावलम्बी विकास में वृद्धी की है। उन्होने कहा कि अपने देश के लोग पर्यावरण के पुश्तैनी जानकार है इसलिए प्राकृतिक संसाधनो के दोहन और संरक्षण के काम साथ-साथ चलते है। दुनियां में अपने देश का पर्यावरण संरक्षण में अलग ही पहचान है। कहा कि पर्यावरण पूरक धन्धे इस देश मे ही संपादित होते है। मौजूदा वक्त नये भारत के साथ पर्यावरण विकास को स्वरोजगार से जोड़ा गया है। ताकि लोगो को अहसास हो कि वे पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रहरी भी हैं तो उन्हे इन संसाधनो से स्वावलम्बी रोजगार भी मिल रहा है। इस दौरान एचएनबी केन्द्रीय विश्व विद्यालय श्रीनगर में भूगोल विभागाध्यक्ष प्रो॰ मोहन पंवार, पर्वतीय शोध केन्द्र एचएनबी केन्द्रीय विश्व विद्यालय श्रीनगर के निदेशक डा॰ अरविन्द दरमोड़ा, र्कीतिनगर टिहरी गढवाल की जिला पंचायत सदस्य राजेश्वरी जोशी, श्रीनगर चैरास के ग्राम प्रधान जयकृष्ण भट्ट, सामाजिक कार्यकर्ता तेजराम सेमवाल, पत्रकार शकर भाटिया आदि मौजूद रहे।

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