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देवभूमि डायलॉग कार्यक्रम : सीएम ने समाज के लिए सराहनीय कार्य करने वालो को किया सम्मानित

देहरादून | आज आयोजित देवभूमि डायलॉग  कार्यक्रम में मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत द्वारा सम्मानित किये गये युवाओं व उद्यमियों ने भी सुझाव एवं अनुभवों को साझा किया। मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र ने कहा कि समाज में बदलाव लाने वाले युवा उद्यमियों के सुझावों पर ध्यान दिया जायेगा। इस अवसर पर सम्मानित होने वाली रंजना रावत ने अपने सहयोगियों के साथ ऑर्गैनिक फार्मिंग से सैकड़ों लोगों की जिंदगी बदल दी। पहाड़ पर मशरूम की खेती शुरू की। आज वह पहाड़ में मशरूम गर्ल के नाम से जानी जाती है। पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर और मल्टीनेशनल कंपनी में काम करने वाले पौड़ी के आशीष डबराल ने दशकों पुराने तिमली विद्यापीठ को अपनी मेहनत से पुनर्जीवित किया और आज वहां के बच्चों को संस्कृत में शिक्षा के साथ साथ डिजिटल एजुकेशन और रोबोटिक तकनीक भी सिखा रहे हैं। आशीष ने ग्रामीणों को कलेक्टिव फार्मिंग के लिए प्रेरित किया और अपने क्षेत्र में सब्जियों की खेती से किसानों की आमदनी दोगुना करने की दिशा में काम कर रहे हैं। आशीष कीतिमली विद्यापीठ ने एक निजी संस्था के सहयोग से बुजुर्गों के लिए इमरजेंसी एंबुलेंस की शुरुआत भी की है। पौड़ी के मनीष जोशी ने यूरोप के कई देशों में एडवेंचर स्पोर्ट्स की ट्रेनिंग लेकर कंडारा में हिमालयन फ्लाइंग स्कूल की स्थापना की, और विगत 25 वर्षों से पहाड़ के युवाओं को पैराग्लाइडिंग के गुर सिखा रहे हैं। मनीष जोशी माउंटेन साइक्लिंग और वाइल्ड सफारी की संभावनाओं को तलाशने में भी जुटे हैं। पिथौरागढ़ की प्रियंका जोशी पॉली हाउस, बीज वितरण, पशुपालन, मासिक बचत योजना, कृषि के लिए उन्नत उपकरण, मशरूम उत्पादन, फूलों की खेती, मुर्गी पालन जैसे कामों को बढ़ावा दे रही हैं। स्थानीय नकदी फसलों को बढ़ावा और औषधीय गुणों से युक्त टिमरू और इलायची के उत्पादन को भी प्रोत्साहित कर रही हैं। इसके साथ ही ग्रामीणों की मदद से हल्दी, पहाड़ी जड़ी बूटी, अदरक, डेयरी उत्पादन, कीवी और स्ट्रॉबेरी के उत्पादन को बढ़ावा दे रही हैं, साथ ही इन सबी प्रोडक्ट की मार्केटिंग के लिए कास्तकारों को स्थानीय बाजार उपलब्ध करवा रही हैं। पेशे से चार्टर्ड अकाउंटेंट आलोक ने नेचर कनेक्ट आउटडोर नाम की कंपनी गठित करके उत्तराखंड में पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में पहल की। 2011 में पहाड़ी क्षेत्र में कई घरों को होम स्टे के तौर पर विकसित किया। कुछ समय पूर्व आपने कृषि क्षेत्र में कुछ नए प्रयोग करके उत्तराखंड में नई फसलों की संभावना जगाई। मणिपुर का ब्लैक राइस, काली हल्दी, काला अदरक की पैदावार की। डोईवाला में ऑर्गैनिक गुड़ तैयार करने की पहल भी शुरू की है। पिथौरागढ़ की रेखा धामी ने ड्राइविंग सीखी, और खुद की कैब से हजारो यात्रियों को रेगुलर यात्रा करवाती हैं। रेखा, ड्राइविंग स्कूल खोलकर महिलाओं को ड्राइविंग के जरिए रोजगार से जोडना चाहती हैं। उन्होंने हजारों महिलाओं को एक हौसला दिया है। पप्पू किसान ने चमोली जिले के सीमांत क्षेत्र घेस और हिमनी में न्यूजीलैंड से आयातित बीज और नई तकनीक से  मटर की फसल अच्छी खासी आमदनी कर रहे हैं। टिहरी के दो युवाओं कुलदीप और संदीप ने मंडुवे की स्वादिष्ट बर्फी तैयार की। उनकी यह स्वादिष्ट मिठाई दिल्ली और देहरादून में पॉपुलर हो रही है। पौड़ी जिले के मितेश्वर आनंद उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा में चयनित हुए। उन्होंने स्थानीय प्रकृति प्रेमियों के साथ पौधरोपण कार्य शुरू किया। गर्जिया देवी परिसर के आसपास 32 प्रजातियों के पौधे लगाकर बायोडायवर्सिटी गार्डन एवं फाइकस गार्डन स्थापित किया। देहरादून में शिल्पा बहुगुणा इवेंट मैनेजमेंट के जरिए देहरादून के कॉलेजों से स्टूडेंट्स को हायर करके उन्हें रोजगार देने की कोशिश कर रही है। सुधीर सुंद्रियाल ने फीलगुड यानी भलु लगद नाम से ट्रस्ट बनाकर बंजर पड़ी जमीनों को आबाद किया और वहां ऑर्गैनिक सब्जियों का उत्पादन शुरू किया। देहरादून के रमेश पेटवाल युवाओं को दक्ष बनाकर उनके रोजगार और आजीविका का रास्ता साफ किया है। उन्होंने अब तक 10 हजार से ज्यादा युवाओं को स्किल डेवलेपमेंट की ट्रेनिंग देकर उन्हे प्लेसमेंट के जरिए रोजगार दिलवाया है।  मनोज उनियाल ने कारोबार जगत की अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा उत्तराखंड के गांवों को बिजली से रोशन करने में खर्च किया। उन्होंने माइक्रो ग्रिड तकनीक से अब तक 7 दूरस्थ गांवों को बिजली से रोशन कर चुके हैं। इसके अलावा दूसरे चरण में 21 गावों तक बिजली पहुंचाने का काम कर रहे हैं। दूरस्थ क्षेत्रों में गांवों में होम स्टे योजना को बढ़ावा दे रहे हैं और यहां एडवेंचर एक्टिविटीज को बढ़ावा दे रहे हैं। ग्रामीण इलाकों में आजीविका सुधार के लिए स्थानीय उत्पादों को मार्केट उपलब्ध कराने के साथ साथ कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित करने की दिशा में भी काम कर रहे हैं। तकनीक के सहरा 50 गांवों को स्मार्ट विलेज बनाने के लक्ष्य पर काम कर रहे हैं। हेमलता महिला सशक्तीकरण और उनके स्वास्थ्य को लेकर कई साल से सराहनीय कार्य कर रही हैं। बच्चियों को स्वस्थ रखने के लिए पौष्टिक तत्वों से भरपूर डाइट उपलब्ध करवा रही है। उन्होंने अब तक 100 से ज्यादा टीबी ग्रस्त बालिकाओं को टीबी से लड़ने की हिम्मत दी है और उनके चेहरे पर खुशी लाने की कोशिश की है। अध्यापक  हुकुम सिंह उनियाल ने सामुदायिक सहयोग से स्कूल से वंचित रह गए बच्चों के लिए निशुल्क भोजन और आवास की मुहैया करवाया। वर्तमान में 136 छात्र छात्राएं उनके आदर्श हॉस्टल में शिक्षा ले रहे हैं। गीतेश और खीम सिंह रिवर्स माइग्रेशन को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने गांवों में बसने और खेतों को आबाद करके स्थानीय लोगों की आजीविका सुधारने की दिशा में काम कर रहे हैं। 12 ग्राम सभाओं में आपकी संस्था स्थानीय उत्पादों की पैदावार को बढ़ावा देने और बंजर खेतों को आबाद करने की दिशा में पहल कर रहे हैं। उत्तरकाशी के रहने वाले पंकज राणा ने दिव्यांगता को अभिशाप नहीं बनने दिया, बल्कि छोटी उम्र में बड़ा मुकाम हासिल करके लाखों दिव्यागों के प्रेरणास्रोत बनकर उभरे हैं। पंकज राणा भारत की दृष्टिबाधित फुटबॉल टीम के कप्तान भी रह चुके हैं। उन्होंने तीन अंतर्राष्ट्रीय मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व कर 2 गोल दागे भी हैं। इस पूर्व मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री आवास स्थित जनता मिलन हाॅल में समाज के हर वर्ग से सीधा जनसंवाद स्थापित करने के उद्देश्य से ‘देवभूमि डायलाॅग’ कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री  त्रिवेन्द्र ने सभी जनपदों से आये युवा सामाजिक कार्यकर्ताओं का अभिनन्दन करते हुए कहा कि युवा भविष्य के निर्माता हैं। हम कैसा उत्तराखण्ड चाहते हैं इस विषय  पर राज्य के प्रबुद्धजनों, लेखकों, कवियों, गीतकारों द्वारा बहुत कुछ लिखा गया। राज्य निर्माण के पीछे आन्दोलनकारियों की जो सोच थी, हमें उनकी सोच एवं सपने को साकार करना होगा। प्रदेश के विकास के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के तीव्र विकास के लिए युवाओं को स्वरोजगार की ओर आगे बढ़ना होगा तथा अन्य लोगों को भी अपने साथ स्वरोजगार से जोड़ना होगा। हम अपने बल पर क्या कर सकते है, इस सोच के साथ राज्य को आगे बढ़ाने की जरूरत है। कार्यक्रम का संचालन मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार  रमेश भट्ट ने किया। इस अवसर पर पलायन आयोग के उपाध्यक्ष  एसएस नेगी, सचिव डी.सेन्थिल पांडियन, सचिव कौशल विकास डाॅ.पंकज कुमार पाण्डेय, आईटीडीए निदेशक  अमित सिन्हा,  अनिल जोशी, हार्क संस्था के डॉ.महेंद्र सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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