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पर्यटन मानचित्र से प्रसिद्व सूर्य मन्दिर कटारमल को जोड़ा जाएगाः महाराज

UK

देहरादून/अल्मोड़ा। उत्तर भारत के गौरव के रूप में प्रसिद्व सूर्य मन्दिर कटारमल को पर्यटन मानचित्र से जोड़ने के साथ-साथ वहाॅ पर अवस्थापना विकास को प्राथमिकता दी जायेगी, यह बात प्रदेश के पर्यटन संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने आज सूर्य मन्दिर कटारमल में मेले के शुभारम्भ अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि प्रदेश में नवगृृह सर्किल बनाने का प्रयास किया जा रहा है साथ ही यहाॅ पर साउण्ड, लाईट सिस्टम को विकसित करने के साथ-साथ 22 अक्टूबर एवं 22 फरवरी को सूर्य की सीधी किरणें मन्दिर में सतरंगी इन्द्रधनुश के रूप में पड़ती है उसे लेजर के जरिये दिखाया जायेगा। यहाॅ पर सूर्य देव सात घोड़ो पर विराजमान है जो अपने आप में अदभुत व अलौंकिक है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि मन्दि परिसर को विकसित करने के साथ-साथ यहाॅ पर स्थापित मूर्तिया जो दिल्ली, उत्तर प्रदेष सहित राजकीय संग्रहालय में रखी गयी है इसके लिए केन्द्रीय पुरातत्व विभाग के साथ समन्वय स्थापित कर उन्हें यहाॅ पर स्थापित करने का प्रयास किया जायेगा। यहाॅ पर सूर्य भगवान पदमासन में बैठे है यहाॅ पर पाण्डुराजा की जो प्रतिमायें थी जो वर्तमान में राजकीय संग्रहालय में उन्हें भी यहाॅ लाने का प्रयास किया जायेगा। उन्होंने कहा कि पर्यटन विभाग के द्वारा यहाॅ पर हैलीपैड का निर्माण कर हैली सेवा को विकसित किया जायेगा साथ ही विवेकानन्द पर्यटन सर्किट को विकसित करने के साथ टाईबल टूरिज्म को पिथौरागढ़ जनपद में विकसित किया जायेगा। उन्होंने कहा कि उदय षंकर नाट्य अकादमी का यथोचित लाभ मिल सके इसके लिए भी संस्कृति विभाग को जिम्मेदारी दी जा रही है ताकि जिस भावना से इसका निर्माण कराया गया था वह सही साबित हो सके। पर्यटन मंत्री ने कहा कि इस मन्दिर परिसर में जो भी मूर्तिया मन्दिरों में थी उसे पुनः वही पर स्थापित करने का प्रयास किया जाय। उन्होंने कटारमल मन्दिर परिसर के समीप पर्यटन विभाग द्वारा किये जा रहे कार्यों का भी निरीक्षण किया और कार्याें पर संतोश जताया। 9वी षताब्दी में स्थापित इस मन्दिर की अपनी अलग पहचान है। पूर्व की ओर पहाड़ी की चोटी पर अल्मोड़ा के सामने कटारमल मन्दिर अवस्थित है। कटारमल में सूर्य मन्दिर के देवता बूढ़ादीत या वृद्व दित्य प्राचीन सूर्य देवता के रूप में माने जाते है। यह मन्दिर अपने षानदार वास्तुकला, कलात्मक पत्थर एवं धातु की प्रतिमा और खूबसूरत नक्काषीदार खम्बे व लकड़ी के दरवाजे के लिए विख्यात है। पर्यटन मंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए देवी सर्किट, षैव सर्किट सहित अन्य धार्मिक स्थलों को विकसित करने के साथ-साथ वहाॅ पर लोगो को सुविधा मिल सके इसके लिए पर्यटन विभाग द्वारा अनेक कार्य किये जा रहे है। उन्होंने संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही और विलुप्त हो रही संस्कृति को बचाने के लिए सबसे आगे आने की अपील की। इससे पूर्व उन्होंने मन्दिर में पूर्जा- अर्चना की और हवन यज्ञ भी किया उसके बाद विषल भण्डारे में प्रसाद ग्रहण किया। मन्दिर कमेटी द्वारा ग्राम प्रधान कमला देवी ने स्मृति चिन्ह व षाल ओढ़ाकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उपजिलाधिकारी विवेक राय, तहसीलदार पी0डी0 सनवाल, वृहस्पति गिरि महाराज, महिपाल मेहता, महेन्द्र सिंह, गोपाल सिंह, सुन्दर सिंह, राजेन्द्र सिंह, रमेष तिवारी, गणेष जलाल सहित अन्य लोग उपस्थित थें इस कार्यक्रम का संचालन जसवंत सिंह मेहरा ने किया।

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