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मंगल ध्वजारोहण एवं गर्भ कल्याणक महोत्सव का भव्य शुभारम्भ, जानिए खबर

 

देहरादून | देहरादून नगर में 23 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद आज श्री आदिनाथ जिनबिम्ब पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य शुभारम्भ हुआ।परम पूज्य संस्कार प्रणेता जैनाचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी महामुनिराज के पावन सान्निध्य में देहरादून स्थित श्री दिगम्बर जैन पंचायती मंदिर एवं जैन भवन, गांधी रोड पर प्रतिष्ठा महोत्सव का शुभारंभ देव आज्ञा, गुरु आज्ञा एवं घटयात्रा के साथ हुआ।केसरिया परिधान में सुसज्जित इंद्र–इंद्राणियों ने मंगलमयी घटयात्रा निकाली।महोत्सव के दौरान मुख्य धर्म ध्वजारोहण का सौभाग्य श्री विनोद जैन (अध्यक्ष, जैन समाज देहरादून) को प्राप्त हुआ, जबकि अयोध्या नगर (मंडप) का उद्घाटन श्री विनोद जैन (कोर्ट वाले) द्वारा किया गया।महोत्सव के मुख्य संयोजक संदीप जैन (बड़ागांव वाले) ने बताया कि इस पावन आयोजन में तीर्थंकर भगवान के माता-पिता बनने का सौभाग्य

अनिल जैन एवं शशि जैन (दिल्ली) को प्राप्त हुआ।
अन्य प्रमुख पात्रों में —
सौधर्म इंद्र : अमित जैन एवं पूनम जैन (मेडिकल)
धनपति कुबेर : राजेश जैन एवं अर्चना जैन
यज्ञनायक : अमित जैन एवं दीपा जैन
ईशान इंद्र : सचिन जैन एवं तन्वी जैन
सनत इंद्र : राजकुमार जैन एवं प्रीति जैन
महेंद्र इंद्र : अमित जैन एवं अरुणा जैन शामिल रहे।

चित्र अनावरणकर्ता : अतुल जैन (108, टैगोर विला)
दीप प्रज्ज्वलनकर्ता : सुरेश जैन (मुरादाबाद)

दिनभर की प्रमुख मंगल गतिविधियाँ

प्रातः 6:15 बजे — नांदी मंगल अनुष्ठान, व्रतदान विधि, घटयात्रा, भूमि शुद्धि, देव आज्ञा, गुरु आज्ञा एवं श्री जिन स्थापना।प्रातः 8:00 बजे — ध्वजारोहण, मंडप उद्घाटन, चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, मंगल कलश स्थापना, आचार्य निमंत्रण एवं अतिथि सत्कार।
प्रातः 8:30 बजे — अमृत वचन आचार्य श्री 108 सौरभ सागर जी ने कहा कि उन्होंने सिखाया है कि द्रव्य, गुण और पर्याय से वस्तु को जानने वाला ही अपने आत्म-स्वरूप को समझता है। दूसरों के लिए किए गए कर्मों के बजाय अपनी आत्मा के लिए कर्म करने पर ध्यान देना चाहिए।महामुनिराज के श्रीमुख से।दोपहर 1:00 बजे — सकलीकरण, इंद्र प्रतिष्ठा, मंडप प्रतिष्ठा, अंकुरारोपण, श्री जिनाभिषेक, याग मंडल पूजा, गर्भ कल्याणक संस्कार विधि, सीमंतन संस्कार (गोद भराई उत्सव)।सायं 7:00 बजे — आरती महोत्सव एवं श्री शास्त्र सभा।रात्रि 8:00 बजे — सुधर्मा सभा, तत्व चर्चा, कुबेर द्वारा अयोध्या नगरी की रचना, महाराजा नाभिराय का दरबार, माता मरुदेवी की सेवा, सोलह स्वप्न दर्शन एवं गर्भ कल्याणक की आंतरिक क्रियाएं संपन्न हुईं।

“अवधिज्ञान से इंद्र ने लिया हृदय में ज्ञान,
देव अयोध्या को चले, पूजे गर्भ कल्याण।”

सभी मांगलिक क्रियाएं पंडित अरविंद जैन (दिल्ली) एवं संदीप जैन सजल (इंदौर) के निर्देशन में संपन्न हुईं। भक्ति संगीत का सौंदर्य पारस अंबर एवं पार्टी ने प्रस्तुत किया, जिसने संपूर्ण वातावरण को भक्ति और उल्लास से सराबोर कर दिया। इस अवसर पर मीडिया कोऑर्डिनेटर मधु जैन ने बताया कि 1 नवंबर को तप कल्याणक के भव्य रूप से कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे ।

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